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 संघीय व्यवस्था (Federal System)

प्रस्तावना

संघीय व्यवस्था (Federal System) शासन की वह पद्धति है जिसमें सत्ता का विभाजन केंद्र (Central Government) और राज्यों/प्रांतों (State Governments) के बीच संविधान द्वारा स्पष्ट रूप से किया जाता है। इस व्यवस्था में न तो केंद्र पूरी तरह सर्वोच्च होता है और न ही राज्य पूर्णतः स्वतंत्र; बल्कि दोनों अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में स्वायत्त होते हैं। संघवाद का मूल उद्देश्य विविधता में एकता बनाए रखना, स्थानीय आवश्यकताओं को सम्मान देना तथा लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को बढ़ावा देना है।

विश्व में कई देशों ने अपनी भौगोलिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार संघीय प्रणाली को अपनाया है। उदाहरण के लिए, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया संघीय शासन प्रणाली के प्रमुख उदाहरण हैं।


संघीय व्यवस्था का अर्थ

संघीय शब्द ‘फेडस’ (Foedus) लैटिन शब्द से बना है, जिसका अर्थ है – समझौता या संधि। संघीय व्यवस्था में विभिन्न राज्य या प्रांत मिलकर एक संघ (Union) का निर्माण करते हैं, परंतु अपनी आंतरिक स्वायत्तता बनाए रखते हैं। इस व्यवस्था में संविधान सर्वोच्च होता है और वही केंद्र तथा राज्यों के अधिकारों का निर्धारण करता है।


संघीय व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ

1. संविधान की सर्वोच्चता

संघीय व्यवस्था में संविधान सर्वोच्च कानून होता है। केंद्र और राज्य दोनों संविधान से ही शक्ति प्राप्त करते हैं। कोई भी कानून संविधान के विरुद्ध नहीं बनाया जा सकता।

2. शक्तियों का विभाजन

संघीय शासन में शक्तियों का स्पष्ट विभाजन होता है। उदाहरण के लिए, भारत के संविधान में केंद्र सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची के माध्यम से शक्तियों का वितरण किया गया है।

3. द्विसदनीय विधानमंडल

अधिकांश संघीय देशों में द्विसदनीय (Bicameral) विधायिका होती है। जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका में सीनेट और प्रतिनिधि सभा, तथा भारत में राज्यसभा और लोकसभा।

4. स्वतंत्र न्यायपालिका

संघीय व्यवस्था में एक स्वतंत्र न्यायपालिका होती है जो संविधान की रक्षा करती है और केंद्र तथा राज्यों के बीच विवादों का निपटारा करती है।

5. लिखित एवं कठोर संविधान

संघीय देशों में प्रायः लिखित और अपेक्षाकृत कठोर संविधान होता है, ताकि शक्तियों का विभाजन स्पष्ट और सुरक्षित रहे।

6. दोहरी सरकार

इस व्यवस्था में दो स्तर की सरकारें होती हैं—एक केंद्रीय सरकार और दूसरी राज्य सरकारें। दोनों अपने-अपने क्षेत्र में कार्य करती हैं।


संघीय व्यवस्था के प्रकार

1. शुद्ध संघवाद (Pure Federalism)

इसमें केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट और संतुलित विभाजन होता है। उदाहरण के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका को शुद्ध संघवाद का आदर्श माना जाता है।

2. सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism)

इसमें केंद्र और राज्य मिलकर कार्य करते हैं तथा परस्पर सहयोग की भावना होती है। भारत में सहकारी संघवाद की अवधारणा विकसित हुई है।

3. प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism)

इसमें राज्य आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं ताकि विकास और निवेश आकर्षित कर सकें। यह आधुनिक समय में आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।





भारत में संघीय व्यवस्था

भारत का संविधान संघीय ढांचे पर आधारित है, परंतु इसमें एकात्मक (Unitary) विशेषताएँ भी हैं। भारतीय संविधान में केंद्र को अधिक शक्तियाँ दी गई हैं, विशेषकर आपातकालीन परिस्थितियों में।

भारतीय संघवाद की कुछ प्रमुख विशेषताएँ—

  • संविधान की सर्वोच्चता
  • शक्तियों का तीन सूचियों में विभाजन
  • स्वतंत्र न्यायपालिका
  • राज्यों का पृथक अस्तित्व
  • आपातकालीन प्रावधान

भारत को “संघीय ढांचे वाला अर्ध-संघीय राज्य” (Quasi-Federal State) कहा जाता है क्योंकि यहाँ केंद्र की भूमिका अपेक्षाकृत अधिक मजबूत है।


अमेरिका में संघीय व्यवस्था

संयुक्त राज्य अमेरिका संघीय शासन प्रणाली का प्रमुख उदाहरण है। यहाँ संविधान के माध्यम से केंद्र और राज्यों के बीच स्पष्ट शक्तियों का विभाजन किया गया है। प्रत्येक राज्य का अपना संविधान और सरकार होती है।

अमेरिकी संघवाद की विशेषताएँ—

  • शक्तियों का स्पष्ट पृथक्करण
  • राज्यों की अधिक स्वायत्तता
  • न्यायपालिका की मजबूत भूमिका
  • संघ और राज्यों के बीच संतुलन

आधुनिक संदर्भ में संघवाद

आज के वैश्वीकरण और तकनीकी युग में संघवाद का स्वरूप बदल रहा है। सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद के माध्यम से राज्यों को अधिक अधिकार दिए जा रहे हैं। आर्थिक सुधारों, स्थानीय प्रशासन और डिजिटल शासन के क्षेत्र में संघीय ढांचा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उदाहरण के लिए, भारत में नीति आयोग (NITI Aayog) के माध्यम से सहकारी संघवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे केंद्र और राज्य मिलकर विकास की योजनाएँ बनाते हैं।


निष्कर्ष

संघीय व्यवस्था एक ऐसी शासन प्रणाली है जो विविधता वाले देशों के लिए अत्यंत उपयुक्त है। यह न केवल शक्ति के विकेंद्रीकरण को सुनिश्चित करती है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को भी सुदृढ़ बनाती है। यद्यपि इसमें कुछ चुनौतियाँ और सीमाएँ हैं, फिर भी यह व्यवस्था बड़े और बहुसांस्कृतिक देशों में स्थिरता और एकता बनाए रखने में सहायक सिद्ध हुई है।

आज के समय में संघवाद केवल राजनीतिक ढांचा नहीं, बल्कि विकास, सहयोग और प्रतिस्पर्धा का माध्यम बन चुका है। यदि केंद्र और राज्य आपसी सहयोग और विश्वास के साथ कार्य करें, तो संघीय व्यवस्था देश को सशक्त, समृद्ध और संगठित बना सकती है।

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